Industry In Bihar

Industry In Bihar ! जाने पूरी कहानी hindi मे, #industryinbihar

नमस्कार दोस्तों, हम बिहार हैं. हम बिहार से हैं. इसलिए आज बिहारी भाषा मे आप सबको कुछ बतेयंगे. दो चार दिन पहले twitter पर #industryinbihar दुनिया भर मे ट्रेंडिंग पर चल रहा था. industry in bihar क्या है? और ये क्यों शुरू हुआ, उसके बारे मे आपको सब कुछ बताएँगे. 

तमाम विकाश और उन्नति के खोखले वादों के बिच हम आज भी वैसे ही लड़ रहे हैं, जैसे 1947 के पहले आजादी के लिये. आज बिहार की लगभग 12 कड़ोर जनसँख्या हैं. जिनमे से लगभग कड़ोरो लोग बिहार से बहार जाते हैं रोजगार के लिये, वे कई राज्यों जैसे महारास्ट्र, दिल्ली, गुजरात, आँध्रप्रदेश, कर्नाटक, और भारत के तमाम इंडस्ट्री बहुल राज्य जहाँ उनको रोजगार मिल सके जाते रहते हैं.

उनमे से मै भी एक हूँ, जो कुछ महीने पहले तक कई राज्यों के चक्कर काट रहा था. हो सकता हैं शायद आप भी उनमे से एक हैं. इन सबका कारण क्या हो सकता हैं? क्यों जाते है ये बिहारी लोग दुसरे राज्यों मे रोजगार हेतु? क्या बिहार मे रोजगार नहि हैं? क्या मनानिये मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार के विकाश का पोल नहि खोलता है, ये Industry in Bihar का Wold wide ट्रेंड करना?

इन सभी बातों पर चर्चा करेगे इस पोस्ट मे तो इस पोस्ट को आप शुरू से अंत तक जरुर पढियेगा. लेकिन उससे पहले आईये पढ़ते हैं, की आखिर बिहार की ये दुर्दशा क्यों है? ये लेख मेरे गुरूजी श्री मुरली प्रसाद जी के द्वारा अपने facebook हैंडल पर लिखा गया हैं, जिसका लिंक मैं आपको निचे दे दूंगा.

*आखिर बिहार की ऐसी दुर्दशा क्यों हुई?* Industry In Bihar
————————————————

एक वह भी क्या दिन थे जब पूरी दुनिया के लोग बिहार में आने के लिए आकुल -व्याकूल एवं लालायित रहते थे ।बिहार पूरे विश्व का आर्कषण का केन्द्र बन गया था ।बिहार में जन्में बुद्ध ने अपने ज्ञान को पूरे विश्व में इस तरह फैलाया कि बिहार पूरी दुनिया का प्रेरणास्त्रोत बन गया ।चीन का फाह्यान ,ह्वेनसांग जैसे ज्ञानार्थियों का बिहार में आने का ताता लग गया ।

नालंदा बौद्ध दर्शन का केन्द्र बन गया।पूरी दुनिया से बौद्ध भीक्षु बिहार में आने लगे ।इसी लिए यह बिहार “विहार” के नाम से प्रसिद्ध हुआ ।लेकिन एक आज का दिन है कि सभी लोग बिहार से भागना चाहते हैं ।कोरोना ने सभी की आँखे खोल दी है ।50लाख मजदूरों की घर वापसी (बिहार वापसी) देखकर आँखें फटी की फटी रह जाती हैं ।इन मजदूरों के अलावा बिहार के वैसे करोड़ों लोग हैं जो भारत के अन्य राज्यों में या भारत के बाहर के अन्य देशों में अपना स्थायी रूप से आशियाना बना लिए हैं । Industry In Bihar

लॉक डाउन में बिहार में आने वाली उमड़ी भीड़,जन सैलाब भूखे-प्यासे ,गिरते-पड़ते , पैदल,साइकिल,मोटर साइकिल ,रिक्शा ,ठेला,कंटेनर , ट्रक,बस की छत ,ट्राइसाइकिल ,कुछ लोग मुख्य सड़क से ,कुछ लोग रेल लाईनों द्वारा ,कुछ गाँवों या खेतों की पग डंडियों द्वारा ,माथे पर गठरी ,पीठ पर बैग,गोद में बच्चा , हाथ में थैला ,धूप में पसीने से थकबक,कभी वर्षा से लदफद,चेहरे एवं होठों पर हकबक ,किसी के पैर में टूटी चप्पल,किसी का पैर खाली ,भूरव से रोता-विलखता नन्हा सा बच्चा,लाठी टेकते बुढ़े लोग ,परेशान युवा ,छोटे-छोटे पैदल चलते बच्चे ,गर्भवती महिलाएँ,छोटी-बड़ी लड़कियॉं आदि की भयावह और मर्माहत कर देनेवाली स्थिति देख कर भारत के अन्य राज्य या विश्व के देश सोचने के लिए विवश हो गये होगे कि आखिर क्या हो गया इस बिहार को कि कभी प्राचीन बिहार इतना धन-धान्य से सम्पन्न एवं समृद्ध था अौर मात्र कुछ वर्षों में ही इस बिहार की यह दुर्दशा हो गयी ।आखिर बिहार को ऐसी दुर्दशा में पहुँचाने का जिम्मेदार कौन ? शायद इसी का परिणाम आज Industry In Bihar हैं.


1950 में संविधान जब लागू हुआ तो 1952 में बिहार की स्वतंत्र सरकार बनी ।आज 2020 लगभग 70वर्ष के अवधिकाल में बिहार में लगभग सभी राजनीति क दलों की सरकार बनी अौर इसमें भिन्न-भिन्न जातियों के मुख्यमंत्री भी हुए ।लेकिन किसी का भी ध्यान बिहार से पलायन करते गरीब लोगों की ओर नहीं गया या गया भी होगा तो यह सोच कर छोड़ दिया गया होगा कि बिहार के गरीब जब बिहार से बाहर हो जाऐगें तो बिहार की गरीबी स्वतः समाप्त हो जाएगी ।

या यह भी संभव है कि सभी मुख्यमंत्री स्वयं अपने तथा सगे-संबंधियों की गरीबी दूर करते रहे ।या यह भी हो सकता है कि यहाँ की सरकार बिहार के गरीबों के प्रति हमेशा उदासिन रही हो ।आश्चर्य तो तब होता है कि सभी मुख्यमंत्री अपने को गरीबों का मसीहा कहते रहे और गरीबों को जाति-पांति का झासा देकर स्वयं फ्रांस का राजा एवं रूस के जार के समान एशोआराम की जिन्दगी जीते रहे । Industry In Bihar

कारण चाहे जो भी हो ,एक बात तो ध्रुव सत्य है बिहार के सभी नेता अर्थ लोलूप ,सत्तासुख भोगी ,जाति एवं वंशवादी ,भाई-भतीजा वादी ,जनता के प्रति संवेदनहीन आदि स्वार्थी विचारधारा के अवश्य रहे जिसके चलते आज यह बिहार इस दयनीय एवं सोचनीय स्थिति में पहुँच गया ।


इस बिहार के नेताओं को उस समय तक भी कुंभकरणी नींद नहीं टूटी जब कभी आसामी लोग बिहारी को लात-जुता,मार मारकर अपने राज्य से भगाते रहे ।कभी बंगाली लोग,कभी पंजाबी लोग,कभी सिक्किम के लोग,कभी मराठी लोग,कभी गुजराती आदि राज्यों के लोग बिहारियों को बेईज्जत करके अपने राज्यों से मार मारकर भगाते रहे फिर भी इन नेताओं के मन में बिहारयों के दुःख दर्द ,पीड़ा ,लांछना ,उपेक्षा ,तौहिनी आदि मानव ता के प्रति इन लोगों के मन में थोड़ी भी सुगबुगाहट , थोड़ी भी संवेदनशीलता ,तनिक भी चिंता फिकर की भावना जागृत नहीं हुई ।इन नेताओं के चेहरे पर थोड़ी भी सिकन नहीं आयी ।


आज नीतीश कुमार जी कह रहे हैं कि बिहार में 50लाख श्रमिकों को रोजगार देगें(हिन्दुस्तान,17मई 20का प्रथम् पृष्ठ) जबकि 6महीने के अन्तराल में चुनाव होने वाला है ।नीतीश की यह घोषणा गले के नीचे नहीं उतड़ती है ।यह घोषणा चुनावी स्टंट है ।पहले तो नीतीश जी यह बतायें कि 15वर्षों में एक सूई का कारखाना नहीं लगा सके बल्कि जो उद्योग लगा हुआ था उसको भी नष्ट कर दिए । Industry In Bihar

अब तीन -चार महीने में वो भी कोरोना अवधि काल एवं चुनावी माहौल में कैसे इतने लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा ।बिहार में 28चीनी मीलें थी,आज मात्र11 मीलें चल रही हैं ।17चीनी मीलें नष्ट होने का क्या कारण था?

सिंदरी खाद् कारखाना बंद पड़ा है ,गाँव-गॉव धुनिया लोग हथकरधा से चादर ,गमछा आदि बनाते थे ,वो बन्द हो गये ।रेशम पालन,मधुमक्खी पालन ,तसर एवं मुंगा के कपड़े बनते थे वे भी लगभग मृतप्राय हो गये ।सरकारी वेतन मान की नौकरी की जगह सभी विभागों में नियोजन की व्यवस्था करके उन कर्मचारियों का इतना आर्थिक दोहन एवं शोषण किया गया कि उतने पैसे से मंहगाई के जमाने में जरूरत की चीजें पूरी नहीं होने लगी तो वे लोग उस को लात मारकर अन्य राज्यों में चले गये ।

आखिर योग्य एवं दक्ष शिक्षक तथा अन्य नौकरीपरस्त लोग क्यों अपर्याप्त वेतन में बिहार रहेंगे ?अन्य राज्यों में TET शिक्षकों को सहायक शिक्षक के रूप में वेतनमान दिया जाता है जबकि बिहार में नियोजित वेतन दिया जाता है ।खैर ,नीतीश ने बिहार की शिक्षा एवं शिक्षक को इस कदर कलंकित किया कि यह कलंक कलियुग में धुलना संभव नहीं ।नीतीश जी हमेशा पूँजीपतियों की जेब भरने का काम किए है ,सड़क ,पुल ,विल्डिंग आदि का बड़े-बड़े ठेकेदारों को ठेका दे करके।गरीबों को तो सौ-पचास की नौकरी दे देकर उसे ठगने का काम किया है ।ऐसी स्थिति में गरीब लोग बाहर नहीं जाते तो और क्या करते ?


जब चुनाव का समय आता है ,चुनावी मौसमी बादल जब मँडराने लगता है तो नेताओ द्वारा लोक- लुभा वनी घोषणाएं होने लगती है ,नयी,नयी योजनाओं का शिलान्यास होने लगता है ,लोगों के बीच भिन्न-भिन्न योज नाओं के माध्यम से पैसा पहुंचाया जाने लगता है ,कहीं जाति ,कहीं धर्म का नारा ,कहीं युद्ध की घोषणा की जाने लगती है अौर जैसे ही चुनाव समाप्त होता है ये सभी योजनाएँ ,घोषणाएँ ,परियोजनाएँ ,शिल्यान्यास आदि ढंढ़े बस्ते में डाल दी जाती है । Industry In Bihar


बिहार में प्राकृतिक संपदा पर्याप्त रही है ।झारखंड जो कभी बिहार का अंग रहा है( 2000तक) , झारखंड खनीजों के लिए काफी धनी रहा है ,यहाँ कोयला ,अबरख ,लौह अयस्क,चूना पत्थर आदि काफी मात्रा में उपलब्ध है ,फिर भी बिहार में उद्योग क्यों नहीं लगा?यहाँ का कोयला अन्य राज्यों के चीनी मीलें चलाने के लिए जाता है लेकिन यहाँ की चीनी मीलें बन्द होती जा रही है । Industry In Bihar

अन्य राज्यों में इतनी खनीजें उपलब्ध नहीं हैं फिर भी वह राज्य बिहार की अपेक्षा विकसित है जहाँ बिहारी लोग जा कर अपनी रोजी -रोटी चलाते हैं और वही खनीज वाला राज्य बिहार उद्योगविहिन है।दक्षिण भारत पठारी राज्य है ।वहाँ की भूमि बिहार के समान उर्वर नहीं है ,फिर भी दक्षिण भारत के लोग बिहार में मजदूरी करने नहीं आते ,यहीं के लोग भारत के अन्य राज्यों में रोजी रोटी के लिए जाते हैं ।

गुजरात ,महाराष्ट्र ,मध्य प्रदेश , पंजाब ,हरियाणा आदि राज्यों की भूर्मि भी बिहार के समान उतना उपजाऊं नहीं हैं ,इसके अलावा बिहार के समान तीनों मौसम अन्य राज्यों में नहीं मिलता ,बिहार की नदियाँ भी हमेशा जलप्लावित रहती है,फिर भी यहाँ की सरकार की उदासिनता के कारण ये सभी प्राकृतिक संपदा उचित एवं पर्याप्त रूप से उपयोग में नहीं आ पाती जिसके चलते लाखों मजदूरों का पलायन अन्य राज्यों में होता रहता है । Industry In Bihar


बिहार की गरीबी का मुख्य दोषी स्वयं बिहारी भी हैं ।यहाँ के लोगों में देखाउपन की भावना अधिक रहती है ।विवाह में काफी संख्या में गाड़ियों ,कीमती बाजा ,अरकैस्द्रा ,बिजली डेकोरेशन एवं काफी संख्या में समाज में ऊँचा ,बड़ा ,अच्छा कहलाने के लिए लोगों को बारात में भोज देना आदि फिजूलखर्ची गरीबी का मुख्य कारण होता है ।

इसके अलावे शादी गिरह ,जन्म दिन , नया साल ,पर्व -त्योहारों,श्राद्ध आदि में देखाने के लिए काफी खर्च करना,स्वयं काम न करके दाई-नौकर द्वारा कराना,औरतों को घरों में कैद रखना ,धर्म के नाम फ्ऱ जैसे अष्टयाम ,कथा-पूजा ,मंदिर दर्शन ,तीर्थ यात्रा करना आदि भाग्यवादी ,अंधविश्वासी,रूढ़ीवादी विचारधाराएँ भी गरीबी का मुख्य कारण है ।

गरीबी का सबसे मुख्य कारण है यहाँ की जमीन का असमान वितरण ।यहाँ 85%भूमि मात्र15%सवर्णो के हाथ में कैद है जबकि 85% अवर्ण लोगों को मात्र 15%भूमि में जीने के लिए विवश होना पड़ता है जिसके लिए इन्हें बाहर जाने के लिए विवश होना पड़ता है ।नीतीश कुमार भूमि की नाप जोख कराने के लिए डी० बंदोउपाध्य आयोग बनाये थे ,उसमें करीब चार करोड़ रू० दस वर्ष पहले खर्च हुआ था ,हालांकि उसका सवर्णो द्वारा काफी विरोध हआ था जिसके चलते यह निर्णय लागू नहीं हो सका फिर भी बिहार की जनता को जमीन की यह विसंगति समझ में आ गयी ।. Industry In Bihar

बिहार राजनीतिक ,सांस्कृतिक दृष्टि से काफी समृद्ध रहा है ।बिहार बुद्ध ,महावीर ,गुरूगोविन्द जैसे महापुरुषोँ की जन्मस्थली रही है ।राम,लक्ष्मण ,भरत शत्रुध्न इन चारों भाइयों का ससुराल मिथिलांचल बिहार में ही स्थित है ,कर्ण का राज्य अंग देश भागलपुर ,जरासंध की राजधानी राजगृह ,दधीचि ऋषि का आश्रम छपरा जिनकी हड्डी निर्मित धनुष से ताड़का का वध हुआ,

गौतम ऋषि का आश्रम रिवेलगंज (गौतम स्थान छपरा)जिनकी पत्नी अहिल्या से देवताओं का राजा इन्द्र ने बलात्कार किया था,गज को बचाने के लिए अौर ग्राह को मारने के लिए भगवान का अवतरण सोनपुर ,लिच्छवी गणराज्य वैशाली जहॉं विश्व में पहली वार गणतंत्र की स्थापना हुई थी ,नालंदा विश्वविद्यालय विश्व का सबसे पुराना शिक्षा केन्द्र ,मगध महाजन पद जहाँ बिंबिसार ,आजतशत्रु उदायिन,नंद वंश ,चन्द्रगुप्त मौर्य ,अशोक आदि राजाओं ने शासन किया ,चाणक्य जैसे नीतिशास्त्र के ज्ञाता ,पांडव का भ्रमण स्थल आदि प्रमुख राजाओं एवं महान् लोगों का स्थल बिहार रहा है ।यहीं के राष्ट्रकवि दिनकर ,रेणु ,विद्या पति ,रामवृक्ष बेनीपुरी ,शिवपूजन सहाय ,भिखारी ठाकुर , राहुल सांकृत्यायन ,जानकी वल्लभ शास्त्री ,चतुरसेन आदि कई प्रसिद्ध साहित्यकार बिहार में ही हुए जिन लोगों ने बिहार का नाम रौशन किया ।

बिहार में 1857की क्रांति का नेतृत्वकर्ता वीरकुंवर सिह बिहार के ही निवासी थे । Industry In Bihar

इसके अलावा फसल ,बाग-बागीचा आदि के लिए भी बिहार प्रसिद्ध रहा है । हाजीपुर केला ,मुजफ्फर पुर की लीची,आम आदि का भी उत्पादन यहाँ काफी मात्रा होता है ।पर बहुत ही खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि बिहार जैसा सुन्दर राज्य ऐसे स्वार्थी नेताओं के हाथ में पड़ गया कि बिहार पूरे विश्व के लिए कलंकित हो गया अन्यथा आज यह बिहार की दुर्दशा नहीं होती ।
—–प्रो० मुरली प्र०

Industry In Bihar

Industry In Bihar

 

तमाम बातों को समझाने के बाद आप समझ गये होंगे की आखिर #industryinbihar इंतना ट्रेंडिंग क्यों कर रहा हैं? यदि आप अब भी नहि समझे हैं, तो मै आपको बता दूँ की फिर आप समझना नहि चाहते होंगे.

परन्तु मैं अपना पुनः कोशिश जरुर करूँगा. बिहार मे रोजगार की कमी, दुसरे राज्यों से पैदल आना और बिहारी भाईयों की अपमान ने आज अपना सर उठाने की कोशिश किया हैं. परन्तु मुझे डर है की उनके सर को कुचला न जाये. मुझे डर है की कही उनको चुनावी वादों, मे उलझा दिया न जाये. मुझे डर हैं की कही बिहार के भोले भाले जनता को उनके जात पात के मुद्दों पर गुमराह न कर दिया जाये.

इन्हें भी पढ़ें…

अब बिहारी भाईयों का भविष्य क्या होगा ? ये तो बताया नहि जा सकता, परन्तु मै इतना जरुर कहना चाहता हूँ, की इस मुद्दे पर सिर्फ बिहार के लोगो को ही नहि बल्कि पुरे भारत को चुप नहि रहना चाहिए. हम सब भारतवाशी एक हैं, और इस मुद्दे पर भी हम सबको एक साथ आने की जरुरत हैं. 

हम बिहारी भाईयों के साथ पुरे देश को खरा होना परेगा. तभी हमारा भारत आगे बढेगा, तभी होगा असली सबका साथ, सबका विकाश!

यदि ये पोस्ट Industry In bihar आपको अच्छा लग हो तो इस पोस्ट को जरुर शेयर कीजियेगा. ताकि इस मुहीम मे आपका भी थोरा सा योगदान हों. पोस्ट को पूरा पढ़ने के लिये आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद!

Leave a Reply